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*~रंगों की भीड़ में एक 'बेरंग' मुलाकात*~

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रंगों की भीड़ में एक 'बेरंग' मुलाकात—भीतर के सन्नाटे से उपजी एक नई कलम। नमस्ते दोस्तों, आज 1 मई 2026 है। खिड़की के बाहर आज का मौसम बहुत ही दिलकश है, आसमान में बादलों ने डेरा जमा रखा है और ठंडी हवाओं के झोंके मन को सुकून दे रहे हैं। इस खुशनुमा सुबह में बैठकर मैं आज से दो महीने पीछे, मार्च के उस दिन को याद कर रही हूँ जिसने मेरे विचारों को कलम थमा दी। बात बहुत पुरानी नहीं है, बस इसी 4 मार्च 2026 की है। चारों तरफ होली का हुड़दंग था, हवा में गुलाल का गुबार था और हर चेहरा किसी न किसी रंग में रंगा था। लेकिन मेरी कहानी थोड़ी अलग थी। मेरी रेटिनल सर्जरी हुई थी और डॉक्टर ने मुझे एक 'सुरक्षित दूरी' पर रहने की सलाह दी थी। मैं देख तो सकती थी, पर उन उड़ते रंगों का हिस्सा नहीं बन सकती थी। जब आप दुनिया की भीड़ से अलग होकर एक कमरे के एकांत में बैठते हैं, तब असल में आपकी अपने आप से मुलाकात होती है। उस दोपहर, जब सब बाहर रंग खेल रहे थे, मैंने महसूस किया कि भीतर की हलचल बाहर के शोर से कहीं ज्यादा गहरी है। बस, वही पल था जब मैंने बिस्तर पर लेटे-लेटे मोबाइल उठाया और बिना सोचे अपनी पहली कुछ पंक्ति...