द डोनाल्ड ट्रम्प शो: पाताल लोक की डील से उड़ते बालों के 'मिस्ट्री' तक

 


ट्रम्प पुराण: सफेद महल का दूसरा अध्याय

​दुनिया के रंगमंच पर एक ऐसे महानायक का प्रवेश होता है, जिनके बाल सूरज की सुनहरी किरणों से भी ज़्यादा 'स्थिर' और चमकीले हैं। हम बात कर रहे हैं उस शख्स की, जिन्होंने राजनीति को 'सीरियस बिजनेस' से बदलकर एक 'प्राइम-टाइम Reality Show' बना दिया।

डोनल्ड ट्रम्प—एक ऐसा नाम जिसे सुनकर 'लॉजिक' (तर्क) खुदकुशी कर लेता है और 'तथ्य' (Facts) कोमा में चले जाते हैं। ये दुनिया के इकलौते ऐसे इंसान हैं जो सूरज की तरफ उंगली दिखाकर कह सकते हैं, "ये रोशनी मेरी वजह से है, सूरज तो बस मेरा साइड-किक है," और उनके समर्थक 'Make Sun Great Again' के नारे लगाने लगेंगे।

​उनका आत्मविश्वास इतना ऊंचा है कि अगर वो गलती से कुएं में गिर जाएं, तो बाहर आकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे और कहेंगे— "मैंने अभी-अभी पाताल लोक के साथ एक 'हिस्टोरिक डील' की है, पानी बहुत शानदार है, और मेंढक मुझे बहुत प्यार करते हैं!"

इकॉनमी या जादुई पिटारा?

​उनके लिए दुनिया सिर्फ दो हिस्सों में बँटी है: या तो "Great" (महान) या फिर "Loser" (असफल)। उनके शब्दकोश में 'शायद' या 'बीच का रास्ता' जैसा कोई शब्द ही नहीं है। ट्रम्प साहब की इकॉनमी का गणित बड़ा सरल है: अगर अमीर और अमीर हो रहे हैं, तो ये उनकी 'महान डील' है। और अगर गरीब पिस रहा है, तो वो यकीनन किसी दूसरे देश की 'साज़िश' है।

​उन्होंने अमेरिका को एक देश की तरह नहीं, बल्कि एक 'कैसीनो' की तरह चलाया—जहाँ 'हाउस' (यानी खुद ट्रम्प) हमेशा जीतता है, बाकी जनता बस टोकन लेकर लाइन में खड़ी रहती है।

'ग्रेटनेस' का ओवरडोज और दीवारें

​ट्रम्प साहब का काम करने का तरीका बड़ा ही साफ़ है। अगर उन्होंने एक ईंट भी रखी, तो वो 'दुनिया की सबसे शानदार और ऐतिहासिक ईंट' है। उनके राज में बेरोज़गारी सिर्फ एक आँकड़ा नहीं, बल्कि उनके 'टैलेंट' का सबूत है, और अगर महँगाई बढ़े, तो समझो वो अर्थव्यवस्था को 'मसालेदार' बना रहे हैं। उनके शासन का मूल मंत्र बड़ा सरल था— "एक दीवार बनाओ"। चाहे वह सरहद पर हो, या उन लोगों के बीच जो उनकी बातों से इत्तेफाक नहीं रखते।

​इनके कामों की फेहरिस्त में सबसे ऊपर आती है 'महान दीवार'। चीन वालों ने तो हज़ारों साल पहले बना ली थी, लेकिन ट्रम्प साहब ने इसे एक 'इमोशन' बना दिया। भले ही मेक्सिको ने पैसे नहीं दिए, लेकिन ट्रम्प ने दुनिया को यह तो समझा ही दिया कि शांति से रहने का सबसे अच्छा तरीका है—अपने पड़ोसी को ही 'विलेन' घोषित कर देना। ट्रम्प ने दुनिया को ये अनोखा 'आर्किटेक्चर' सिखाया कि नफरत की ईंटें लगाओ और उस पर 'टैक्स' का पेंट कर दो। दीवार बनी या नहीं, ये अलग बात है, लेकिन उन्होंने लोगों के दिमाग में ऐसी दरारें डाल दीं कि अब पड़ोसी भी एक-दूसरे को 'अवैध' समझने लगे हैं।

कूटनीति और 'कोवफेफे' (Covfefe)

​उनके लिए कूटनीति (Diplomacy) का मतलब है—सामने वाले को तब तक ट्वीट से घेरो, जब तक वह खुद ही 'ब्लॉक' न हो जाए। व्हाइट हाउस के कर्मचारी सुबह अलार्म से नहीं, ट्रम्प के सुबह 3 बजे वाले ट्वीट्स के 'धमाकों' से जागते थे। जब वे बोलना शुरू करते हैं, तो विशेषण (Adjectives) भी शरमा जाते हैं। उनके पास दुनिया का सबसे बड़ा दिमाग है, सबसे शानदार सौदे (Deals) हैं, और मुमकिन है कि उनके पास दुनिया का सबसे चमकदार 'ऑरेंज' ग्लो भी है।

​उन्होंने 'Covfefe' जैसा शब्द देकर अंग्रेजी भाषा का जो कत्ल किया, उसके लिए शेक्सपियर की आत्मा आज भी गूगल ट्रांसलेट पर माथा पीट रही है। उनके लिए सच वो नहीं है जो कैमरे में दिखे, सच वो है जो वो 'ALL CAPS' में चिल्लाकर लिख दें। वे इतिहास नहीं लिखते, वे तो 280 अक्षरों में 'इतिहास' को टैग कर देते हैं।

वर्तमान धमाका: ईरान-इज़राइल और विश्व युद्ध 3.0 की 'डील'

​जब दुनिया परमाणु बमों की गिनती कर रही है और ईरान-इज़राइल एक-दूसरे को 'रिटर्न गिफ्ट' भेजने की तैयारी में हैं, तब सफ़ेद महल का वो जादुई शहंशाह हाथ में 'गोल्फ स्टिक' लिए मैदान में उतरा है। ट्रम्प साहब के लिए युद्ध कोई विनाश की लीला नहीं, बल्कि एक 'बैड बिजनेस डील' है जिसे वो अपने स्टाइल में 'सेट' करने आए हैं।

  • मिसाइलें या दिवाली के पटाखे?: ट्रम्प का मानना है कि ईरान और इज़राइल जो मिसाइलें दाग रहे हैं, वो संसाधनों की बर्बादी है। उन्होंने तेहरान को संदेश भिजवाया है— "देखो, ये मिसाइलें बहुत महँगी हैं। अगर तुम्हें शोर ही मचाना है, तो मुझसे पटाखे खरीद लो, मैं तुम्हें महान डिस्काउंट दूँगा। युद्ध करो, पर प्रॉफिट के साथ!" * 'नोबेल शांति पुरस्कार' की ज़िद: पूरी दुनिया परमाणु युद्ध के डर से कांप रही है, लेकिन ट्रम्प साहब आईने के सामने खड़े होकर अपना 'लुक' सेट कर रहे हैं। वो कह रहे हैं— "बाइडेन ने युद्ध शुरू करवाया, मैं इसे फिनिश करूँगा। मैं ईरान के सुप्रीम लीडर और इज़राइल के प्रधानमंत्री को अपने गोल्फ कोर्स पर बुलाऊँगा। जो हारेगा, उसे सरेंडर करना होगा।" * मिडल ईस्ट का रियल एस्टेट एजेंट: जब दुनिया के नेता नक्शे पर सेना की टुकड़ियाँ देख रहे हैं, ट्रम्प साहब वहां 'कसीनो' और 'होटल' की जमीन ढूंढ रहे हैं। उनका विज़न साफ़ है— "गाज़ा की पट्टी हो या तेहरान की गलियां, यहाँ बीच (Beach) बहुत शानदार बन सकते हैं। बस थोड़ी सी साफ-सफाई (यानी युद्ध) की ज़रूरत है, फिर यहाँ दुनिया का सबसे बड़ा 'ट्रम्प रिसॉर्ट' होगा।"

विज्ञान के साथ 'दोस्ती' और मेडिकल सलाह

​कोरोना के समय उन्होंने जो 'मेडिकल सलाह' दी, वो सुनकर डॉक्टर स्टेथोस्कोप छोड़कर हिमालय चले गए। 'डिसइंफेक्टेंट' पीने की सलाह देना और सूरज की रोशनी को फेफड़ों में डालने की बात करना—ये साबित करता है कि उनका दिमाग 'आउट ऑफ दिस वर्ल्ड' है। शायद इसीलिए वो ग्लोबल वार्मिंग को भी नहीं मानते, क्योंकि उनके पास खुद का 'हॉट' टेम्परामेंट जो है। अगर बारिश हो जाए और उन्हें पसंद न आए, तो समझो बादल भी 'फेक न्यूज़' फैला रहे हैं। अगर चुनाव के नतीजे उनके पक्ष में न हों, तो यकीनन कैलकुलेटर ही किसी गहरी साजिश का हिस्सा है।

हार? वो क्या होती है? (हारकर जीतने वाले को... ट्रम्प कहते हैं!)

​दुनिया में लोग चुनाव हारते हैं, रोते हैं या रिटायर हो जाते हैं। लेकिन ट्रम्प साहब? वो हारते हैं तो कहते हैं, "मैं जीत गया, बस गिनती गलत हुई है।" उनके लिए लोकतंत्र एक ऐसा खेल है जिसमें अंपायर तभी सही है जब वो उनके पक्ष में फैसला दे। उनकी डिक्शनरी में 'हार' शब्द ही नहीं है। अगर वो हार जाएं, तो इसका मतलब है कि 'वोटिंग मशीन' में भूत घुस गया था या फिर चंदा मामा ने साज़िश की थी।

​उनकी ज़िद ऐसी है कि अगर वो सीढ़ियों से फिसल जाएं, तो कहेंगे— "मैं गिरा नहीं हूँ, मैं दरअसल ज़मीन की क्वालिटी चेक करने का एक 'स्पेशल मिशन' कर रहा था। धरती बहुत मज़बूत है, मैंने चेक कर लिया!" या फिर— "मैंने ग्रैविटी के साथ बहुत बड़ी और ऐतिहासिक डील की है।" उनके लिए हर समस्या का हल एक ही है—या तो उस पर टैक्स लगा दो, या उसे 'ट्विटर' (अब ट्रुथ सोशल) पर ब्लॉक कर दो।

गोल्फ और 'जज' का अनोखा रिश्ता

​अब बात करते हैं उनके असली प्यार की— गोल्फ। कहते हैं ट्रम्प साहब कभी गोल्फ नहीं हारते। क्यों? क्योंकि अगर उनकी गेंद पानी में गिर जाए, तो वो पानी को 'अवैध' घोषित कर देते हैं। अगर गेंद गड्ढे से दूर रह जाए, तो वो हवा को 'बायस्ड' (पक्षपाती) बोल देते हैं। उनका गोल्फ खेलने का अंदाज़ निराला है—स्कोरकार्ड वो खुद लिखते हैं, और ज़ाहिर है, उसमें वो हमेशा 'टाइगर वुड्स' के भी बाप साबित होते हैं। उनके लिए गोल्फ का मैदान वो जगह है जहाँ वो अपनी 'दीवार' बनाने की प्रैक्टिस करते हैं—बस फर्क इतना है कि यहाँ दीवार 'सैंड ट्रैप' की होती है।

​ट्रम्प का मानना है कि जज को भी 'फायर' किया जा सकता है अगर वो उनकी पसंद का फैसला न सुनाए। उनके लिए कानून एक 'डील' है— "तुम मुझे क्लीन चिट दो, मैं तुम्हें अपने गोल्फ क्लब की मेंबरशिप दूँगा।" वो तो यहाँ तक सोच सकते हैं कि अगर वो फिर से राष्ट्रपति बने, तो सुप्रीम कोर्ट के जजों को अपनी रैलियों में 'बैकअप डांसर' की तरह खड़ा कर देंगे।

इतिहास का सबसे बड़ा शोमैन और 'फ्लाइंग' हेयर

​चाहे अदालत का 'हथौड़ा' चले या गोल्फ का 'क्लब', ट्रम्प साहब का चश्मा हमेशा गुलाबी (यानी गोल्डन) रहता है। वो ऐसे शूरवीर हैं जो जेल की कोठरी से भी 'ओवल ऑफिस' का इंटीरियर डिज़ाइन करवा सकते हैं। उनके लिए हर 'चार्जशीट' एक नया 'सक्सेस मंत्र' है।

​अब बात करते हैं द 'फ्लाइंग' हेयर: सफेद महल का सबसे बड़ा मिस्ट्री शो। दुनिया के सात अजूबों के बारे में तो आपने सुना होगा, लेकिन डोनल्ड ट्रम्प का हेयरस्टाइल दुनिया का 'आठवाँ अजूबा' है। ये बाल नहीं, ये दरअसल 'इंजीनियरिंग का एक चमत्कार' है, जो गुरुत्वाकर्षण (Gravity) और भौतिकी (Physics) के नियमों को रोज सुबह अंगूठा दिखाता है।

  • आंधी-तूफान का 'असली' टेस्ट: कहा जाता है कि जब ट्रम्प साहब अपने 'एयर फ़ोर्स वन' विमान से उतरते हैं, तो पूरी दुनिया की नज़रें मौसम के हाल पर नहीं, बल्कि उनके बालों पर टिकी होती हैं। हवा कितनी भी तेज़ क्यों न हो, उनके बाल एक खास 'फ्लाइंग फॉर्मेशन' में रहते हैं। ऐसा लगता है जैसे हर एक बाल ने अलग से शपथ ले रखी हो— "मैं झुकूँगा नहीं, चाहे तूफ़ान आ जाए!"
  • 'हेयरस्प्रे' या केमिकल वेपन?: उनके इस लुक के पीछे का असली राज़ है—एक 'गुप्त किस्म का हेयरस्प्रे'। अफवाह है कि इस स्प्रे की एक बोतल से अमेरिका की आधी दीवार बन सकती है। जब वो स्प्रे करते हैं, तो ओजोन परत में छेद होने की खबरें आने लगती हैं। उनके बालों को सेट करने की प्रक्रिया किसी 'नासा' (NASA) के रॉकेट लॉन्च से कम जटिल नहीं है।
  • 'कोवफेफे' का असली मतलब!: लोग आज तक 'कोवफेफे' शब्द का मतलब ढूंढ रहे हैं। दरअसल, ये एक कोडेड संदेश था, जिसका असली मतलब था: "Covering Over Very Fine and Elaborate Frontal Extensions"। उनके बाल दरअसल एक 'वास्तुशिल्प' (Architecture) का नमूना हैं—सामने से लेकर पीछे तक, पूरा एक 'गोल्डन ब्रिज' बना हुआ है।
  • जब हवा ने की 'साज़िश'!: उन दुर्लभ पलों में जब कोई हवा का झोंका उनके 'कवर-अप' को उखाड़ फेंकता है, तो दुनिया को एक 'डरावना' दिव्य दर्शन होता है—एक ऐसा दृश्य जिसे देखकर 'एलियंस' भी अपना रास्ता बदल लें। वो पल ऐसा होता है जैसे किसी ने 'सीक्रेट फाइल्स' खोल दी हों, जिन्हें दोबारा बंद करने में ट्रम्प साहब को घंटों लग जाते हैं।
  • 'हेयरस्टाइल' नहीं, ये एक 'ब्रैंड' है!: ट्रम्प के लिए उनके बाल महज़ स्टाइल नहीं, उनका 'लोगो' हैं। वो एक ऐसा 'क्राउन' है जिसे वो कभी नहीं उतारते, भले ही वो गोल्फ खेल रहे हों या कोर्ट में खड़े हों। अगर वो फिर से राष्ट्रपति बने, तो शायद 'स्टैचू ऑफ लिबर्टी' को भी 'ट्रम्प-कट' हेयरस्टाइल देने का ऑर्डर दे देंगे।

​ट्रम्प के बाल हमें सिखाते हैं कि अगर आपका 'कवर-अप' मज़बूत हो, तो आप दुनिया को बेवकूफ बना सकते हैं। चाहे पूरी दुनिया उन्हें 'गंजा' कहने पर उतारू हो जाए, वो अपनी सुनहरी जुल्फों को हवा में लहराते हुए यही कहेंगे— "मेरे पास दुनिया के सबसे बेहतरीन बाल हैं, और हवा? हवा तो बस मेरी 'पब्लिसिटी' कर रही है!"

​ट्रम्प राजनीतिज्ञ नहीं, एक 'ब्रैंड' हैं। एक ऐसा ब्रैंड जो कहता है कि अगर आप ज़ोर से झूठ बोलें, तो वो सच से ज़्यादा चमकता है। उनकी वापसी का मतलब है—मनोरंजन की गारंटी, तथ्यों की विदाई और 'कॉन्फिडेंस' की ऐसी मीनार जिसके आगे बुर्ज खलीफा भी छोटा लगे।  

                                                                                                                                     --- मनीषा

डिस्क्लेमर (Disclaimer):

यह लेख विशुद्ध रूप से एक व्यंग्य (Satire) है, जिसका उद्देश्य किसी व्यक्ति, पद या देश की गरिमा को ठेस पहुँचाना नहीं, बल्कि समकालीन वैश्विक राजनीति के कुछ पहलुओं पर एक विनोदी और मजाकिया कटाक्ष करना है। इसमें दी गई घटनाएँ और उपमाएँ लेखक की कल्पना और रचनात्मक अभिव्यक्ति का हिस्सा हैं। इसे केवल मनोरंजन और साहित्यिक दृष्टिकोण से ही पढ़ा जाना चाहिए।


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

डर का अंत : बेड़ियों से बोध तक

युद्ध की मंडी: हथियारों का उत्सव और लहू की 'करेंसी'